मंगलवार, जुलाई 26, 2005

रोक दो मेरे ज़नाजे को.....

रोक दो मेरे ज़नाजे को,मेरी जान आ गयी है
पिछे मुडकर देखो जरा, दारू की दुकान आ गयी है
बोतल छुपा दो कफन मे मेरे, कब्र मे लेटा पिया करुँगा
जब मांगेगा हिसाब खुदा तो, जाम बना कर दिया करुँगा.

1 Comments:

At 2:05 अपराह्न, Blogger रजनीश मंगला said...

भईया मज़ेदार शायरी है। लिखते रहो।

 

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