रविवार, जुलाई 31, 2005

आयी जन्जीर की झंकार खुदा खैर करे


आयी जन्जीर की झंकार खुदा खैर करे
दिल हुवा किसका गिरफ्तार खुदा खैर करे

जाने यह कौन मेरी रूह को छुकर गुजरा
एक कयामत हुई बेजार खुदा खैर करे

लम्हा लम्हा मेरी आन्खो मे खिंच जाती है
एक चमकती हुई तलवार खुदा खैर करे

खुन दिल का छलक ना जाये आन्खो से
हो ना जाये कहीं इज़हार खुदा खैर करे

ना जाने इस गाने मे क्या जादू है, कितनी ही बार सुनो मन नही भरता. गाने के बोल दिल को तो छु जाते है, कब्ब्न मिर्झा की वो लहराती हुई आवाज सिधे दिल की गहराइयो मे उतर जाती है. संगीत खय्याम का है बोल जान निसार अख्तर के है. मै कभी कभी ये गाना लुप मे डाल कर घन्टो तक सुनते रह्ता हुं. आप ये गाना रागा पर सुन सकते है

1 टिप्पणी:

Neeraj ने कहा…

आयी जन्जीर की झंकार खुदा खैर करे
दिल हुवा किसका गिरफ्तार खुदा खैर करे

वाह क्या ग़ज़ल है.. सुभहान अल्लाह !! लम्हा लम्हा मेरी आंखों में खिंची जाती है.... एक चमकती हुई तलवार ख़ुदा ख़ैर करे.. शुक्रिया दोस्त याद दिलाने का..कई दिनों बाद सुनी ग़ज़ल